Nithalla Chintan http://www.readers-cafe.net/nc Thori Masti Thora Chintan Wed, 09 Feb 2011 02:59:04 +0000 en hourly 1 http://wordpress.org/?v=3.0.1 NithallaChintanhttp://feedburner.google.com bhediyon ke desh men http://feedproxy.google.com/~r/NithallaChintan/~3/qf_zsuE1Hpg/ http://www.readers-cafe.net/nc/2011/02/escape-a-molestation/#comments Wed, 09 Feb 2011 02:59:04 +0000 Tarun http://www.readers-cafe.net/nc/?p=374 इसे पढ़ते पढ़ते सोचकर देखिये, आप एक दिन पास के ही सुंदर से जंगल में भ्रमण का विचार बनाते हैं और निकल पड़ते हैं अकेले ही। खुबसूरत वादियों, झरनों, पेड़ों से मंत्रमुग्ध होकर चलते आपके सामने अचानक कुछ भेड़िये आ जाते हैं। उन भेड़ियों से बचने के लिये आप बेतहाशा भागने लगते हैं और अंत में एक जगह जाकर रूक जाते हैं क्योंकि आगे एक बड़ी खाई है। आप के सामने अब दो ही रास्ते हैं या तो आपको नोचने खाने को बेकरार भेड़ियों से भिड़ जायें और या आपके पीछे की खाई में कूद जायें। आप दोनों में से कोई भी रास्ता क्यों ना चुने दुर्गत आपकी ही होनी है, जिंदगी आप की ही दाँव पर लगनी है

अगर आप को ऊपर कही बात कहानी लगे तो इसके पात्रों से भी परिचय करा दूँ -

टेक – १
मध्य प्रदेश का एक जंगल और इसमें भेड़ियों से बचने के लिये युवती चलती ट्रेन से छलान लगा देती है। भेड़िये अभी भी बगैर किसी खरोंच जिंदगी के मजे ले रहे हैं और उस युवती की जिंदगी से जंग जारी है। वो ये जंग शायद जीत जाये लेकिन क्या उसका ये घाव कभी भर पायेगा?

टेक – २
उत्तर प्रदेश का एक जंगल और इसमें युवती भेड़ियों से भिड़ जाती है। यहाँ भी भेड़िये जिंदगी के मजे ले रहे हैं और लेते रहेंगे और वो युवती जिंदगी से अपने जिंदा रहने की जंग लड़ रही है। वो भी ये जंग शायद जीत जाये लेकिन क्या वो फिर से वही जिंदगी जी पायेगी?

ये घटना तो एक ऐसे प्रदेश में हुई है जिसकी सर्वेसर्वा ही एक महिला है और वो भी उस पार्टी की जो अपने को उस वर्ग विशेष की मसीहा बताती है जिसके साथ ये हादसा हुआ है। बात निकली है तो कह दूँ, जब से उत्तर प्रदेश में समाजवादी और बहुजन पार्टी की सरकारें अपनी अपनी पारियां खेल रही है उत्तर प्रदेश का दिन-ब-दिन पतन ही हो रहा है।

ऐसी घटनायें पढ़कर अपनी बचीखुची डेमोक्रेसी की भावना टूटने बिखरने लगती है, ऐसी घटनायें घटने के बाद जो भी पुलिस करती है या कर रही है वो अंत में जाकर महज खानापूर्ती के सिवाय कुछ नही लगता।

अभी कुछ दिनों पहले प्रवीण अपनी एक पोस्ट में मन के बच्चे के बचे रहने की बात कर रहे थे। प्रवीण अच्छा लिखते हैं क्योंकि वो खुद अच्छा सोचते हैं और जाहिर हैं वो एक अच्छे इंसान भी होंगे क्योंकि वो ही लिख सकता है -

जो था अच्छा बचा रहे,
जो था सच्चा बचा रहे,
जीवन की यह आपाधापी,
मन का बच्चा बचा रहे।

लेकिन हर रोज जब इस तरह की खबरें देखने सुनने में आती हैं तो शक होने लगता है प्रवीण की लिखी ये लाईनें कितने दिन जिंदा रह पायेंगी। कहीं ऐसा ना हो कभी किसी को ऐसा लिखना पड़े -

जो था अच्छा बचा नही,
जो था सच्चा बचा नही,
जीवन की वो आपाधापी,
मन का बच्चा बचा नही।

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anokha vigyaaapan: jab yoo-tyoob vidiyo se ninja bahar kood pade http://feedproxy.google.com/~r/NithallaChintan/~3/Qv6PFDbykcs/ http://www.readers-cafe.net/nc/2011/02/nexus-one-ad-ninjas-unboxing-2/#comments Wed, 02 Feb 2011 01:52:44 +0000 Tarun http://www.readers-cafe.net/nc/?p=371 बहुत सालों पहले, जब यू-ट्यूब नही था तब एक जावा स्क्रिप्ट बहुत पोपुलर थी जो वेब पेज में लिखे हुए को इधर उधर घुमा देती थी, फोटुओं वाले पेज की फोटो बिखरा देती थी। शायद उसी को याद करके पैट्रिक बोयविन ने नेक्सस वन (Nexus One) फोन के लिये ये विज्ञापन बनाया जिसमें एक एक करके सभी निंजा विडियो से बाहर कूद पेज की ऐसी तेसी फेर देते हैं। जो भी है कमाल की कल्पनाशीलता है, कैसे ये पोसिबिल हुआ खुद दिमाग लगाकर देखिये।

नीचे दिये विडियो को प्ले करने के बाद “Show Me the Second Ninja’s Unboxing” बटन पर क्लिक कीजिये, आगे का विडियो एक नये पेज (या टैब) पर खुलेगा और मजा लीजिये इस अनूखे विडियो का। और हाँ विडियो देखने के बाद जरा नीचे स्क्रोल करना और निंजा के नॉनचक (अस्त्र) को माउस से इधर-उधर मूव करके देखना मत भूलना।

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ghar kee jogan jogani aan ganv kee siddh http://feedproxy.google.com/~r/NithallaChintan/~3/NA7RlmDIQm4/ http://www.readers-cafe.net/nc/2010/11/rakhi-ka-insaaf/#comments Sat, 20 Nov 2010 02:13:21 +0000 Tarun http://www.readers-cafe.net/nc/?p=359 इस पोस्ट को आगे बढ़ाने से पहले ये बेहतर होगा कि इस टाईटिल का मतलब समझ लिया जाय, जस्ट इन केस अगर किसी को समझ ना आये। दरअसल ये एक हिन्दी मुहावरा है ‘घर का जोगी जोगना आन गाँव का सिद्ध” चूँकि मैं बात महिला की करने वाला हूँ इसलिये जोगन जोगनी कर दिया, इसका मतलब होता है – A Wise (wo)Man to the rest of the world but a nobody at home. इस मुहावरे के मतलब को घर की मुर्गी दाल बराबर से भी कम्पेयर करके समझा जा सकता है।

बहराल, कुछ दिनों पहले खबरों में पढ़ा कि टेलीविजन के दो सीरियल ने लक्ष्मण रेखा पार कर डाली जिस कारण सरकार ने उनका समय प्राइम टाईम से हटाकर रात के ११ बजे करने का निर्णय लिया। सास-बहू के देश में ऐसा केसे केसे (कैसा समझा जाये) सोचते सोचते नजर गयी सीरियल के नाम में, एक का नाम था राखी का इंसाफ और दूसरा बिग बॉस।

बिग बॉस ३ के कुछ ऐपिसोड यू ट्यूब में देखे तो राखी के पारिवारिक समाचार मिले (यानि की अंदर की खबर), और फिर जब यू ट्यूब ये जानने के लिये खंगाला कि ऐसा क्या है जो देर रात खिसकाया जा रहा है। देख के अपने तो तोते उड़ गये, राखीजी दूसरों के झगड़े सुलझा रही थी, बिछड़े हुओं को मिलाने की कोशिश कर रही थी। जो खुद बिछड़ा हो, जिसकी खुद अनबन हो वो दूसरों के झगड़े सुलझाये, करमचंद बने, ज्ञान बाँटे तो कहना ही पड़ेगा ना – घर की जोगन जोगनी, आन गाँव की सिद्ध। पहले तो इसे बंद कर देना चाहिये लेकिन भाषा या विचारों की स्वतंत्रता (ऐसा ही कुछ था ना?) की दुहाई देकर ये चालू रहता है तो ये सीरियल ११ के बजाय १२ बजे करना चाहिये क्योंकि कुछ घरों में बच्चे देर से सोते हैं और टीवी-एमए यानि (TV-MA: TV for matured) व्यस्कों के लिये की रेटिंग के साथ दिखाना चाहिये।

यकीन नही होता कैसी कैसी गंद परोसी जा रही है प्राइम टाईम पर, जिस बुद्धू बॉक्स में आज से कुछ सालों पहले हम रामायण, महाभारत, दादा-दादी की कहानी, विक्रम बेताल, परमवीर चक्र, देख भाई देख, हम लोग, बुनियाद, नुक्कड़, भारत एक खोज, चाणक्य, ये जो है जिंदगी, मालगुड़ी डेज जैसे सीरियल देख के बड़े हुए उसमें इंसाफ और बॉस के नाम पर क्या क्या दिखाया जा रहा है। अब इनसे कौन क्या सीखेगा वो तो कुछ सालों में दिख ही जायेगा फिलहाल तो आप इस लिंक पर जाकर देखिये हमारे तोते क्यों उड़े, नेशनल टीवी में प्राईम टाईम में आने वाले सीरियल में ये देख जैरी स्प्रिंगर को भी कंपटीशन का खतरा मँडराने लगे।

वार्निंगः ये क्लिप सिर्फ और सिर्फ तभी देखिये जब कोई बच्चा आसपास ना हो
Warning: Watch it alone due to abusive language in the clip

ये कैसा इंसाफ

अब अगर आप मुम्बई में रहते हैं तो क्या बतायेंगे कि शिव सैनिकों ने राखी के इंसाफ को लेकर कुछ हल्ला मचाया कि नही या उनका विरोध सिर्फ पाकिस्तानी प्रतियोगियों तक ही सीमित था।

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http://www.readers-cafe.net/nc/2010/11/rakhi-ka-insaaf/feed/ 3 http://www.readers-cafe.net/nc/2010/11/rakhi-ka-insaaf/
kala shukravar http://feedproxy.google.com/~r/NithallaChintan/~3/Y4iJLHL90mw/ http://www.readers-cafe.net/nc/2010/11/black-friday/#comments Mon, 15 Nov 2010 01:00:38 +0000 Tarun http://www.readers-cafe.net/nc/?p=353 काला शब्द वैसे अगर दिन के आगे लगे तो वो अशुभ दिन समझा जाता है लेकिन अगर अमेरिका में ये नवंबर के चौथे बृहस्पतिवार के बाद वाले शुक्रवार के आगे लगे तो इससे अच्छा कोई दिन नही। नवंबर का चौथा बृहस्पतिवार यानि थैंक्सगिविंग, और इसका अगला दिन काला शुक्रवार (ब्लैक फ्राईडे) यानि शोपिंग का सबसे बड़ा दिन और क्रिसमस की शॉपिंग की शुरूआत।

इसे काला इसलिये कहा जाता है क्योंकि ये समझा जाता है (और देखा गया है) कि ये उस पीरियड की शुरूआत है जब रिटेलरस की बुक लाल से काले में तब्दील हो जाती है। एकाउंटिंग में लाल यानि नुकसान और काला यानि फायदा, पब्लिक को भी काफी सस्ते दामों में चीजें खरीदने को मिल जाती है उनके भी पैसे बचते हैं यानि की उनकी पॉकेट में भी लाल कम काला ज्यादा।

मैसी की थैंक्सगिविंग परेड की शुरूआत १९२४ में हुई थी तभी से उसके अगले दिन से क्रिसमस की शोपिंग की शुरूआत होती है ऐसा रिकार्ड में है लेकिन उस दिन को ब्लैक फ्राइडे १९६० के बाद कहा जाने लगा। ये भी माना जाता है कि इसका सबसे पहला उल्लेख फीलिडेलफिया में हुआ था –

JANUARY 1966 — “Black Friday” is the name which the Philadelphia Police Department has given to the Friday following Thanksgiving Day. It is not a term of endearment to them. “Black Friday” officially opens the Christmas shopping season in center city, and it usually brings massive traffic jams and over-crowded sidewalks as the downtown stores are mobbed from opening to closing.

कमाल इस बात का है बावजूद इसके (हल्ला हो) ये दिन २००३ से पहले कभी भी साल के सबसे बिजी शोपिंग दिन के रूप में अपनी जगह नही बना पाया।

इस दिन कई लोग दुकानें सुबह ४-५ बजे ही खोल देते हैं, कुछ रात के १ बजे (यानि बृहस्पतिवार की रात, शुक्रवार की सुबह), कुछ दुकानें शुक्रवार रात भर खुली रहती हैं। लोग बृहस्पतिवार की रात १२ बजे से ही दुकानों के आगे लाईन लगा कर खड़े हो जाते हैं। साल २००८ में (शुक्रवार, नवंबर २८) दुकान का दरवाजा खुलने के बाद घुसने वाली भीड़ के कदमों की ठोकर से वॉलमार्ट के एक कर्मचारी की मृत्यु हो गयी थी।

पड़ोसी राज्य कनाडा ने जब देखा कि इस दिन बार्डर क्रोस करके उसके काफी देशवासी अमेरिका जाकर शॉपिंग करने लगे हैं तो २००९ से कनाडा के रिटेलर भी ब्लैक फ्राईडे की डीलस देने लगे, गौरतलब है कि कनाडा का बाक्सिंग डे शॉपिंग के लिहाज से ब्लैक फ्राईडे जैसा ही माना जाता है।

अब इंटरनेट और आनलाईन शॉपिंग के युग में साईबर ब्लैक फ्राइडे, साईबर थैंक्सगिविंग और साईबर सोमवार (थैंक्सगिविंग के बाद का सोमवार, २००५ से) भी मनाये जाने लगे हैं।

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